भारतीय अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत

 

अर्चना सेठी1, बी एल सोनेकर2

1सहायक प्राध्यापक, अर्थषास्त्र अध्ययनषाला, पडित रविषंकर शुक्ला विष्वविद्यालय, रायपुर

2सहप्राध्यापक, अर्थषास्त्र अध्ययनषाला, पडित रविषंकर शुक्ला विष्वविद्यालय, रायपुर

*Corresponding Author E-mail: sonekarptrsu@gmail.com

 

ABSTRACT:

भारत एक साथ कई मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रहा है।श्षासन कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने तथा लाकडाउन के चलते सुस्त हुई अर्थब्यवस्था को पटरी पर लाने और सीमा पर चीन के दबाव को समाप्त करने का प्रयास कर रहा है। वास्तव में लाकडाउन के बाद की स्थ्तिि और चीन सेेन्य तनाव से उपजे हालात को भारत एक अवसर के रुप में देख रहा ळें आत्मनिर्भर भारत एक ऐसा भारत जो हर क्षेत्र में अपनी स्वयं की योग्यता और क्षमता रखता है। केंद्र सरकार ने भी मनरेगा का बजट 60 हजार करोड से बढाकर 1 लाख करोड कर दिया है लेकिन इतना पर्याप्त नही है अतः भारत षासन ने 20 करोड रु की आर्थिक पैकेज की धोषणा दिहाडी मजदूरों छोटे किसान एवं मध्यम वर्ग के लिए की है। साथ ही कुटीर उद्योग लघु उद्योग और स्टार्टअप को मजबूती मिले ज्यादा से ज्यादा रोजगार सृजन हो एवं भारतीय अर्थब्यवस्था मजबूत हो सके। इसके साथ ही साथ लोगों में अवबंस वित सवबंसए डंाम पद प्दकपंए स्वदेषी अपनाना और चीनी उत्पादन का बहिष्कार करना आदि अभियान भारतीय अर्थब्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहा है। अब षासन के साथसाथ आमजनता को भी मेक इन इंडिया को अपना पसंदीदा ब्रांड बनाना होगा। पूर्ति पक्ष में सुधार के साथ ही मांग में वृद्वि के लिए आवष्यक है षासन नगद हस्तांतरण करे जिससे आय बढे एवं मांग उत्पन्न हौ।

 

KEYWORDS: आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, वोकल फार लोकल।

 


 

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आपदा को एक अवसर के रुप मे बदलने के लिएं भारतीय प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने 12 मई 2020 को आत्मनिर्भर भारत की षुरुआत की है तथा 20 लाख करोड रु जो कि सकल घरेलू उत्पाद का 10 प्रतिषत है राहत पैकेज के रुप में देने की घोषणा की है ताकि भारतीय अर्थब्यवस्था आत्म निर्भर बन सके। आर्थिक राहत पैकेज से सभी क्षेत्रों की गुणवत्ता बढेगी और दक्षता भी बढेगी। आत्मनिर्भरता आत्मबल और आत्मविष्वास से आती है जिसे पूर्ण संकल्पषक्ति के साथ कार्य करके प्राप्त किया जा सकता है। आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए 5 चीजें जरुरी है। इरादा, समावेषन, निवेष, बुनियादी ढांचा, नवोन्मेष। इस अभियान का उददेष्य 130 करोड भारतवासयों को आत्मनिर्भर बनाना है। 1970 तक भारत और चीन दोनों की सकल घरेलू उत्पाद समान थी। उसके बाद चीन ने अपनी आर्थिक नीतियों में सुधार कर अपनी अर्थब्यवस्था को मजबूत कर लिया आज चीन हर क्षेत्र में निर्यात करता है। सन 1990 में चीन का विदेषी ब्यापार में 3 प्रतिषत योगदान था जो वर्तमान में 25 प्रतिषत हो गया है और हम हर क्षेत्र में आयात पर निर्भर है। अमेरिका इतनी षक्तिषाली देष है क्यों कि वह हर क्षेत्र में निर्यात करता है।

 

करोना वायरस ने इतनी बुरी तरह से दुनिया को अपने षिकंजे में जकडा है कि उससे जल्द छुटकारा पाना कठिन लगता है। संक्रमण से बचाव के लिए अपनाए गए लाकडाउन ने दुनिया भर के देषों की कमर तोड दी है। इसमें सबसे अधिक नुकसान उन गरीबों को हुआ है जिनके दिन की षुरुआत ही रोजी रोटी के तलाष से होती थी। भारत में लाकडाउन एवं अब अनलाकडाउन के दौरान करोडों लोगों का रोजगार चला गया जो एक बहुत बडा संकट है। प्रवासी मजदूर लाखों की तादाद में अपने घर वापिस लौट चुके है। अपने स्तर पर राज्य सरकार उन्हें रोजगार देने की ब्यवस्था कर रही है।उत्तरप्रदेष सरकार ने इसके लिए डाटा बैंक तैयार किया है। उन्हें उनके कौषल के अनुसार रोजगार देने की ब्यवस्था की जा रही है। केंद्र सरकार ने भी मनरेगा का बजट 60 हजार करोड से बढाकर 1 लाख करोड कर दिया है। लेकिन इतना पर्याप्त नही है अतः भारत शासन ने 20 करोड रु की आर्थिक पैकेज की धोषणा दिहाडी मजदूरों छोटे किसान एवं मध्यम वर्ग के लिए की है। 1ण्16 लाख करोड से प्रवासी मजदूरों को मुफत राषन देने की ब्यवस्था की गई ताकि कोई भी भूखे पेट सोने के लिए विवष हो। शासन ने पिछले 3 माह में 20 करोड गरीब परिवारों के जन धन खाते में 31 हजार जमा किए तथा 9 करोड से अधिक किसानों के बैक खाते में 18 हजार करोड जमा किया गया। गावों में श्रमिकों को रोजगार देने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना तीव्र गति से प्रारंभ किया गया। इस पर स्षासन ने 1ण्75 लाख करोड रु का पैकेज दिया। लाकडाउन के दौरान षासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही कि कोई भी ब्यक्ति भूखा ना सोये।

 

प्रस्तुत अध्ययन का उददेष्य आत्मनिर्भर भारत अभियान के उददेष्य बताना उसके प्रति विष्वास जगाना एवं उपयुक्त सुझाव देना जिससे अर्थब्यवस्था में रोजगार एवं मांग उत्पन्न हो।

 

आत्म निभर््ार भारत चुनौतियां और समाधान और षासकीय प्रयास

भारतीय अर्थब्यवस्था की बेरोजगारी एक बहुत बडी समस्या है। भारत में बेरोजगारी की दर मार्च 2020 में 7ण्75 प्रतिषत है और 25 प्रतिषत लोग गरीबी रेखा के नीचे आते है। भारत की जनसंख्या की 65 प्रतिषत अर्थात 100 करोड लोग 16 वर्ष से अधिक आयु के है। इनके समक्ष बेरोजगारी बडी समस्या है। कोविड .19 के दौरान देष में वोकल फार लोकल एवं आत्मनिर्भरता की बात कही गई इससे निष्चित रुप से निजी निवेष में वृद्वि होगीं। आपदा को अवसर में बदलना आत्मनिर्भरता की पहचान बन गई है। जैसे पहले हमारे यहां च्च्म् ज्ञपज नहीं बनता था तथा .95 मास्क का निर्माण बहुत कम होता था। अब हमारे देष में 4ण्5 लाख च्च्म् ज्ञपज एवं 3 लाख .95 मास्क और वेंटिलेटर का उत्पादन प्रतिदिन हो रहा है। ;सोलंकीद्ध इसी प्रकार छत्तीसगढ की महिलाओं ने महुआ जिससे अल्कोहल बनता है जिसका उपयोग सेनीटाइजर बनाने में कर रोजगार सृजन किये। आत्मनिर्भर भारत की दिषा में एक कदम है। यह इस बात का उदाहरण है कि कैसे हमने आपदा को अवसर में बदला।

 

अभी करोना संक्रमण बढ रहा है संकट अभी टला नही है रेल बस के पहिए रफ्तार नहीं पकड पाए है उद्योग प्रारंभ तो हुआ है लेकिन सुस्ती ने उसकी गति थाम रखी है। जिसके कारण प्रधानमंत्री ने अन्न योजना का विस्तार नवंबर तक कर दिया है अर्थात 80 करोड लोगों को मुफ्त अन्न गरीब परिवार को प्रत्येक सदस्य के हिसाब से 5 किलो चांवल या 5 किलो गेहूं देने की योजना अब नवंबर तक चलेगी। प्रति परिवार 1 किलो चना भी मुफत दिया जाएगा। गरीब तबके के लिए यह एक बडी और सीधी राहत है। इसमें कुल 1ण्5 लाख करोड खर्च होगा। एक देष एक राषन कार्ड योजना से इस राहत को और बल मिलेगा। केंद्र एवं राज्य सरकार एैसी योजना बनाए जिससे मजदूरों का आर्थिक पक्ष मजबूत हो यदि मजदूर के हाथ में आय होगी तो देष की अर्थब्यवस्था को गति मिल पाएगी। मनरेगा से मजदूरों को गांव में ही रोजगार तो दिया जा सकता है लेकिन यह पर्याप्त नही है इससे मजदूरों का घर नहीं चल सकता। षासन ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार कर अच्छा कदम उठाया है। षासन को ग्रामीणों के लिए गाांव में ही स्थायी रोजगार की ब्यवस्था करनी होगी उन्हें कृषि से संबंधित रोजगार से जोडना होगा। ग्रामीण स्तर पर कारखानों की ब्यवस्था करनी होगी जहां पर ये काम करके ये देष के विकास में योगदान दे सकेंगे।

 

कोविड 19 महामारी से प्रभावित अर्थब्यवस्था में सुधार के संकेत दिख रहें है और जल्द ही इसमें तेजी आएगी। करोना वायरस और महामारी रोकथाम के लिए लाकडाउन से विभिन्न क्षेत्रों मे आर्थिक गतिविधियां ठप्प हो गई है। अब धीरे धीरे अर्थब्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को खोला जा रहा है। सरकार ने अर्थब्यस्था को गति देने के लिए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा समेत नीतिगत कदम उठाए है। अर्थब्यवस्था में सुधार के संकेत दिख रहा है दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियों जैसे क्षेत्र पटरी पर चुके है। भारत वैष्विक स्तर का उत्पाद बनाने में सक्षम है अर्थात भरतीय कंपनियांे की वैष्विक स्तर के उत्पाद बनाने की क्षमता भारतीय बाजार के हासिल करना तथा घरेलू बाजार की मजबूती का प्रयोग कर वैष्विक बाजारों में पैठ जमाने से है। अर्थब्यवस्था को धीरे धीरे खोले जाने से आर्थिक गतिविधियां बढी है जिससे राजस्व संग्रह में वृद्वि हुई है। अप्रेल माह 2020 में जी एस टी संग्रह 32294 करोड रु था जो मई 2020 में 62009 करोड एवं जून 2020 में जी एस टी संग्रह 90917 करोड रु हो गया। ईंधन और बिजली मांग में भी अप्रेल और मई की तुलना में जून माह में तेजी देखी जा रही है।

 

नीति आयोग ने कहा है हर संकट एक अवसर भी है। इसीलिए यह संकट भी बहुत कुछ गंवाने वाला और काफी कुछ हासिल करने का है। भारत यह निर्णय कर सकता है कि वह खोना चाहता है कि जीतना। भारत को उन 12.13 क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए जहां वह वैष्विक स्तर पर चैंपियन बन सकता है। ये क्षेत्र भारत को 10 .12 साल में उच्च वद्वि के रास्ते पर ले जाएगेे और बडी सख्या में रोजगार सृजित करेंगे। आत्मनिर्भर होने का आषय वैष्विक स्तर के उत्पाद बनाने से है। इसका आषय अलग थलग होना और वैष्वीकरण के खिलाफ नहीें है। अमेरिका एवं चीन के बाद क्रय षक्ति की दृष्टि से भारत तृतीय बडी अर्थब्यवस्था है। भारत का उपभोक्ता बाजार बहुत बडा है लेकिन बहुत सारे क्षेत्र में हम आयात पर निर्भर है। यदि हम अपनी मांग पूरी कर लें तो आयात पर निर्भरता कम हो जाएगी। भारत आर्थिक मोर्चे पर चीन को पछाडने की काषिष कर रहा है। यदि हर भारतीय यह दृढ निष्चय कर ले कि वह चीनी सामान नहीं खरीदेगा तो चीन की रीढ की हडडी टूट जाएगी। महात्मा गांधी ने भी अंग्रेजों को भगाने के लिए तब लाचार कर दिया जब उन्होंने घर घर चरखा चलवाया और विदेषी कपडों का बहिष्कार करवाया

 

उदारीकरण के बाद हुए वैष्वीकरण के चलते भारत में एक बडे बाजार के तौर पर उभरा एनई पूंजी भी आईए लेकिन पूर्ववर्ती षासन ने सजग रहकर वैष्वीकरण की नीतियों पर अंकुष नहीं रखाए नतीजा यह हुआ कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर दम तोडता गया और चीन जैसे देषों के पैर हमारे देष में जमते गए। देष का आयात बढता गया। आज 5000 से अधिक कंपनियां हमारे देष में कार्यरत है और 15 से 20 लाख करोड रु मुनाफा कमा रही है। चीन अकेले 5 लाख रु वार्षिक लाभ कमा रही है। यदि भारतीय अपने खरीदने की आदत बदल दे तो 15 लाख करोड रु हर साल देष में रहेगा और देष को महाषक्ति बनने में देर नहीं लगेगी। आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी पूरा होगा जब देष अपनी 80 से 90 प्रतिषत आवष्यकताएं स्वयं पूरी करेगा। हमारा आयात न्यूनतम हो जाएगा केवल जरुरी तकनीक ही आयात करेगा जिससे देष की विदेषी मुद्रा बचेगी।

 

गलवान में चीन के दुःसाहस का जवाब देने के लिए जब सरकार चीन पर कडाई षुरु की सामरिक और कूटनीतिक जवाब के साथ ही आर्थिक जवाब देना षुरु किया यह बात सामने आई कि चीन अपने सस्ते उत्पाद के दम पर केवल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बल्कि एप के जरिए भी भारतीय बाजार में अपनी पकड बनाया हुआ हैं। सरकार ने कडा कम उठाते हुए 59 चीनी एप पर प्रतिबंध लगा दिया। चीनी कंपनियों के ठेके रदद कर दिए। इसलिए अब भारत के युवाओं के सामने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से लेकर एप तकनीक डाटा रोबोटिक्स आर्टिफिषियल इंटेलिजेंस क्लाउड कंप्यूटिंग आदि क्षेत्र में स्टार्टअप के मौके है। स्टार्टअप बहुत बडा तंत्र है समयोचित है। यदि हमें देष को आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाना है भारत को 5 ट्रिलियन इकानामी बनाना है चीन को आर्थिक चुनौती देनी है लाकडाउन के बाद सुस्त अर्थब्यवस्था में जान फंूकनी है रोजगार के अवसर बढाने है तो हमें स्थानीय उत्पादन को अधिक से अधिक अपनाना होगा। हमें अपनी आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। हमें ना केवल साफटवेयर क्षेत्र में सुपर पावर बने बल्कि हार्डवेयर में भी सुपर पावर बने विष्व में अपना बाजार स्थापित करे। इसके लिए नई चुनौतियों को युवा जोष द्वारा स्टार्टअप में बदलना होगा। स्टार्टअप इंडिया भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है। जिसका उददेष्य देष में प्रतिभा संपन्न युवा जनषक्ति के लिए मजबूत इको सिस्टम का निर्माण करना है जिससे देष में बडे पैमाने पर रोजगार का सृजन हो एवं देष का आर्थिक विकास हो सके। भारत के विकास के लिए उद्यमिता एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना अनिवार्य है। प्राकृतिक साधन से सम्पन्न होने एवं वृहद जनसंख्या के बावजूद वैष्विक उद्यमिता सूचकांक एवं वैष्विक नवाचार सूचकांक में भारत काफी पिछडा हुआ है। क्रयषक्ति की दृष्टि से अमेरिकी अर्थब्यवस्था जहां 12 ट्रिलियन डालर की है चीन की अर्थब्यवस्था 9 ट्रिलियन डालर की है भारतीय अर्थब्यवस्था मात्र 3 ट्रिलियन डालर की है। इस अंतर को उद्यमिता एवं नवाचार को प्रोत्साहित कर कम किया जा सकता है। स्थानीय समस्याओं एवं आवष्यकता के अनूरुप नवाचार द्वारा उत्पादन एवं विपणन ब्यवस्था स्टार्टअप की मूल आवष्यकता है। भारत में बेरोजगार युवाओं को स्थानीय समस्याओं एवं आवष्यकता के अनूरुप उद्यम में प्रेरित कर प्रतिस्थापित किया जा सकता है। आवष्यकता इस बात की है कि उच्च षिक्षण संस्थाओं में इसके लिए उचित वातावरण निर्मित किया जाय। इसमें षिक्षक बैंक एवं षासन की भूमिका महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।हमारी षैक्षणिक प्रणाली ब्यवहारिक नही है। षिक्षा प्रणाली ब्यावसायिक होनी चाहिए। कौषल उन्नयन द्वारा युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जा सकता है। युवाओ को प्रोत्साहित कर स्टार्टअप को बढाना होगा लाइसेंस की प्रक्रिया आसान करना होगा जिससे युवाओं में वोकल फार लोकल की धारणा विकसित होगी क्योकि प्रधानमंत्री मोदी जी के अनुसार लोकल उत्पादन ही एक दिन ब्रांड बन जाता है। पतंजली उत्पादन का नाम यहां उल्लेखनीय है। अतः हमें भी भारतीय उत्पादन को महत्व देना होगा जिससे आयात कम होगा एवं हमारे स्थानीय उत्पादन ही विष्व प्रसिद्व ब्रांड बन जाए। इससे हमारी अर्थब्यवस्था मजबूत होगी उत्पादन बढेगा रोजगार बढेगा।

 

आज भारत की 48ण्6 प्रतिषत रोजगार कृषि क्षेत्र से है कृषि में अनेक समस्या है आज भी मानसून पर आधारित है कृषि क्षेत्र में आज भी 4 माह कार्य होता है।श्षेष समय के लिए डेयरी उद्योगए मुर्गी पालन, कुक्कुट पालन, पषुपालन आदि कुटीर तथा लघु उद्योग को प्रोत्साहित करना होगा जिससे वे घर में रहकर कार्य करें इससे पलायन से उत्पन्न समस्या भी समाप्त होगी और उनको रोजगार भी प्राप्त होगा। उन्हें ब्ययवसायिक कृषि के लिए भी प्रोत्साहित करना होगा।

 

इस समय पूरे विष्व में ेनचचसल बींपद की खोज है जिसकी पूर्ति भारत कर सकता है क्योंकि हमारे यहां मानव षक्ति है जरुरत है उसे ेापससमक षक्ति बनाने की। निवेष किसी भी अर्थब्यवस्था के विस्तार में एक मजबूत कडी मानी जाती है। भारतीय अर्थब्यवस्था निजी निवेष की कमी से जूझ रहा है। वर्ष 2019 में निजी निवेष 28ण्9 प्रतिषत था। थ्क्प् को आर्कषित करने के लिए आवष्यक है कि षासन उपयुक्त नीति बनाए जिससे देष में निवेष बढे एवं उत्पादन और रोजगार बढे। साथ ही हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि इसका भारतीय उद्योगों के विकास में बाधा आए। तकनिकी में हम किसी से कम नहीं है लेकिन हम आज भी विदेषी एप पर निभर््ार हैं इसका कारण है हमारे देष के युवा आर्कषक वेतन पर विदेष जाकर दूसरे देष के लिए कार्य करते है। इन युवा प्रतिभाओं को हमें विदष जाने से रोकना होगा। भारत सर्वाधिक युवाषक्ति वाला राष्ट्र है यहां की 24ण्9 प्रतिषत जनसंख्या युवा है। आत्मनिर्भर भारत एप को आत्मनिर्भर भारत एप मिषन के तहत स्टार्टअप और टेक कम्युनिटी की मदद के लिए लांच किया गया

 

शासन के ये सारे उपाय पूर्ति पक्ष के है। अर्थब्यवस्था में सुधार की जरुरत मांग पक्ष की भी है।श्षासन की सुधार पक्ष के प्रभाव दीर्घकालीन है जबकि आवष्यकता तात्कालिन उपायों एवं सुधारों की हैं। देष में इस समय मुख्य समस्या मांग की कमी है। इसका कारण आय की कमी है। कोविड 19 के कारण 15 से 20 करोड नौकरी समाप्त हो चुकी है। बेरोजगारी 20 प्रतिषत बनी हुई हे।श्षासकीय कर्मचारियों की महंगाई भत्ते वेतनवृद्वि में कटौती की गई है। मांग में वृद्वि के लिए आवष्यक है षासन नगद हस्तांतरण करे जिससे आय बढे एवं मांग उत्पन्न हौ। ;चैधरीद्ध

 

षासन ने श्रमिकों के हित में नया लेबर कोड बनाया है। इससे पूरे देष में श्रमिकों को एक जैसी न्यूनतम मजदूरी मिलेगी। मनरेगा में 13 मई तक 14ण्62 करोड मानव दिवस काम बनाया गया है तथा 10000 करोड रु खर्च हुआ है। 12000 सेल्फ हेल्प ग्रुप ने तीन करोड मास्क और सवा लाख लीटर सेनेटाइजर बनाए है। आत्मनिर्भर भारत अभियान में षासन ने किसानों और ग्रामीण अर्थब्यवस्था के हांथ में अधिक पैसे पहुंचाने की कोषिष की गई है। मार्च और अप्रेल में 86600 करोड रु कृषि में ऋण दी हैं। इन्हें 3 माह तक वापिस करने की आवष्यकता नही हे। नाबार्ड ने सहकारी बैंक एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को रिफाइनेंसींग के लिए 29500 करोड रु दिए है।

 

निष्कर्ष

देष में प्रतिभा संपन्न युवा जनषक्ति के लिए मजबूत इको सिस्टम का निर्माण करना है जिससे देष में बडे पैमाने पर रोजगार का सृजन हो एवं देष का आर्थिक विकास हो सके। भारत के विकास के लिए उद्यमिता एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना अनिवार्य है। आत्मनिर्भरता आत्मबल और आत्मविष्वास से आती है। जिसे पूर्ण संकल्पषक्ति के साथ कार्य करके प्राप्त किया जा सकता है। युवाओं में दृढ संकल्पशक्ति हो देष के प्रति तो उनमें स्वयं आपदा को अवसर में बदलने की षक्ति होगी जैसा कि बाबा रामदेव, धीरुभाई अंबानी एवं रतन टाटा ने किया। पूर्ति पक्ष में सुधार के साथ ही मांग में वृद्वि के लिए आवष्यक है षासन नगद हस्तांतरण करे जिससे आय बढे एवं मांग उत्पन्न हौ।

 

संदर्भ

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2.       प््राधान, अनूप एवं ऋचा सिंघल ;2020द्ध कोरोना आर्थिक सामाजिक चुनोतियां एवं आर्थिक विकास एक परिदृष्यए श्रनदप ज्ञीलंजए टवसण्.10 प्ेेनम.7 छवण्14 श्रनसल2020

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4.       चैधरीए लखन ;2020द्ध देषबंधु, राष्ट्रीय संस्करण, नई दिल्ली, 12 अगस्त, 2020

5.       Jain, Santosh (2020) Effects of Financial Inclusion Flagship Schemes in Rajsthan, Juni Khyat, vol.-10, Issue-7 No.14, July2020.

6.       http://www.igidr.ac.in/working-paper-covid-19-impact-indian-economy/

7.       http://www.researchgate.net/publication/340137009_Impact of coronavirus_COVID_19_on_Indian _economy

8.       https://pmmodiyojna.in>aatm-nirb...

 

 

 

Received on 18.07.2020         Modified on 20.08.2020

Accepted on 10.09.2020         © A&V Publication all right reserved

Int. J. Ad. Social Sciences. 2020; 8(4):191-195.